Ramadan 2024: तरावीह क्या है, रमजान में क्यों और कैसे पढ़ी जाती है ये खास तरह की नमाज

Ramadan 2024: तरावीह एक खास तरह की नमाज है, जिसे रमजान शुरू होते ही मस्जिद और घरों में पूरे महीने पढ़ा जाता है. इसमें 20 रकअत तरावीह की नमाज रमजान के पूरे महीने में हर दिन अदा की जाती है.

रमजान 2024

Ramadan 2024 Taraweeh Dua Niyat Namaz: 11 मार्च 2024 को चांद का दीदार होने के बाद भारत में रमजान का मुकद्दस महीना शुरू हो चुका है और रोजेदार रोजा रख रहे हैं. रमजान का चांद नजर आते ही तरावीह की नमाज भी शुरू हो जाती है. तरावीह की नमाज पढ़े बिना रमजान अधूरा है.

कुरआन में नमाज को जन्नत की कुंजी के समान बताया गया है. वैसे तो हर मुसलमान रोजाना पांच वक्त की नमाज अदा करता है, जोकि इस्लाम का बुनियादी हिस्सा है. क्योंकि इस्लाम में अल्लाह और उनके रसूल पर ईमान लाने के बाद मुसलमानों पर नमाज वाजिब है. इसलिए मर्द औरत सभी पांच वक्त की नमाज अदा करते हैं. माह-ए-रमजान में हर मुसलमान का तरावीह पढ़ना अनिवार्य माना गया है. इसलिए तरावीह की नमाज मर्द और औरत सभी पर फर्ज है.

क्या है तरावीह

तरावीह एक खास तरह की नमाज है, जोकि ईशा की नमाज के बाद पढ़ी जाती है. तरावीह अरबी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है आराम या तेहेरना. तरावीह में 20 रकात होते हैं और हर दो-दो रकात के बाद सलाम फेरा जाता है. पुरुषों के लिए तरावीह की नमाज में तिलावत भी करना होता है. तरावीह की नमाज में दुआएं भी पढ़ी जाती हैं.

तरावीह की नमाज में 20 रकात

तरावीह में 20 रकात नमाजें होती हैं. हर 2 रकात के बाद सलाम फेरा जाता है. 10 सलाम में 20 रकात होती हैं और 4 रकात के बाद दुआ पढ़ी जाती है. दुआ में नमाजी परिवार की खुशियां, रोजी-रोजगार में बरकत और देश और दुनिया की सलामती की दुआ मांगते हैं. 

तरावीह की दुआ (Taraweeh ki Dua)

रमजान में तरावीह की दुआ जरूर पढ़नी चाहिए. क्योंकि तरावीह की दुआ के बगैर तरावीह की नमाज अधूरी है. यहां देखें तरावीह की दुआ-

तरावीह की रकात और सूरह

(Taraweeh Rakat and Surah)

तरावीह में 20 रकात नमाजें होती हैं और इन्हीं 10 रकात से अगली दस रकात पूरी की जाती है.

क्या घर पर पढ़ सकते हैं तरावीह (Taraweeh at Home)

तरावीह की नमाज घर और मस्जिद दोनों ही जगह पढ़ी जा सकती है. आमतौर पर महिलाएं घर पर और पुरुष मस्जिद में तरावीह की नमाज पढते हैं. क्योंकि इस्लाम धर्म में महिलाएं मस्जिद नहीं जाती हैं. इसलिए महिलाएं घर पर ही तरावीह की नमाज पढ़ती हैं. वहीं अगर पुरुष बीमार हो, वृद्ध हो या किसी कारण मस्जिद जाने में असमर्थ हों तो वह भी तरावीह की नमाज घर पर पढ़ सकते हैं. बता दें कि तरावीह की नमाज पढ़ने में लगभग दो घंटे का समय लगता है.

घर  पर   तरावीह  पढ़ने  के    नियम (Taraweeh   Rules)

(Taraweeh Rules)
● घर पर तरावीह की नमाज पढ़ने के कुछ नियम होते हैं. अगर आप रमजान में घर पर तरावीह की नमाज पढ़ रहे हैं तो इन बातों को जरूर ध्यान में रखें-
● जब आप मस्जिद में तरावीह पढ़ते हैं तो मौलाना आदि कोई पूरी कुरआन सुना देता है. लेकिन घर पर ऐसा नहीं किया जा सकता है, अगर वह हाफिज न हो. इसलिए घर पर चुनिंदा सूरत ही पढ़ी जाती है.
● घर पर हाफिज-ए-कुरआन हो तो उसके पीछे तरावीह की नमाज अदा की जा सकती है. लेकिन घर पर हाफिज नहीं होने पर आपको तरावीह को दूसरी तरह से पढ़ना चाहिए.
● तरावीह पढ़ने में लगभग 2 घंटे का समय लग जाता है. अगर आप घर पर तरावीह पढ़ रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि किसी भी काम के लिए तरावीह पढ़ते समय बीच-बीच में न उठे, इससे तरावीह की नमाज का सवाब नहीं मिलता.

पुरुष और महिला के लिए तरावीह की नियत (Taraweeh ki Niyat)

पुरुष के लिए तरावीह की नियत (Taraweeh Niyat for Men) – नियत की मैंने दो रकात नमाज सुन्नत तरावीह, अल्लाह तआला के वास्ते, वक्त इशा का, पीछे इस इमाम के मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ, अल्लाहु अकबर कह कर हाथ बांध लेना है फिर सना पढ़ें.

महिला के लिए तरावीह की नियत (Taraweeh Niyat for Women) – नियत करती हूं मैं दो रकात नमाज सुन्नत तरावीह की, अल्लाह तआला के वास्ते, वक्त इशा का, मुंह मेरा मक्का कअबा की तरफ, अल्लाहु अकबर. इसके बाद हाथ ऊपर करके नियत बांध लें.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि Hindustancharcha.in  किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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